Dr. Sangya Upadhyaya For YuvaAdda.com

डॉ. संज्ञा उपाध्याय ने दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और अब दौलत राम कॉलेज में प्रोफेसर हैं. संज्ञा अपनी कैंपस यादों के साथ-साथ पहले और आज के स्टूडेंट्स में महसूस किया फर्क़ बता रही हैं.

बतौर स्टूडेंट और प्रोफेसर मैंने इस कैंपस में एक लंबा अर्सा गुज़ारा है. वक्त में जो बदलाव आया है उसे हम कई नज़रियों से देख सकते हैं. चीज़ें कमोबेश वही हैं, सड़के वही हैं, इमारते वही हैं लेकिन माहौल में एक खास बदलाव आया है. आज कॉलेजेस के बाहर जो गाड़ियों की भीड़ हमें दिखाई देती है वो हमारे वक्त में नहीं थी. हम लोग बस से ही सफर किया करते थे. उतना पैसा हम लोगों के पास नहीं होता था.

मुझे अभी भी याद है कि किरोड़िमल और हिंदू कॉलेज के बीच एक चाय वाला बैठा करता था. हम चार दोस्त पैसे मिलाकर वहां से दो ब्रैड पकोड़े खरीदते थे और जिसे हम बांट-बाट कर खाया करते थे, उसमें भी अपना ही मज़ा था. पैदल घूम-घूम कर पूरा कैंपस नाप दिया करते थे.

हम घंटो बैठकर तमाम मसलों पर बातचीत करते थे, बहस करते थे बिल्कुल झगड़े जैसी स्थिति भी हो जाती थी, लेकिन बहस ख़त्म हो जाने के बाद फिर वही ठहाके हुआ करते थे. अब जो मैं स्टूडेंट्स के ग्रुप देखती हूं उनमें भी गपशप होती है, मज़े होते हैं लेकिन मैं जो चीज़ सबसे ज्यादा मिस करती हूं वो ये है कि अब यहां वो राजनितिक, देश-दुनिया के मसलों पर उस तरह की बहस बाज़ियां नहीं होती…

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