Dr. Sangya Upadhyaya For YuvaAdda

यूथ या युवा की जब हम बात करते हैं तो हमारे ज़हन में सिर्फ महानगर के शहरों के युवा ही आते हैं. खास कर जब यूनिवर्सिटीज की बात करतें हैं, लेकिन हमें इसे थोड़ा खोल कर देखना चाहिए. युवा सिर्फ वही नहीं हैं जो महानगरो में रहते हैं. गांवों-कस्बो में रहने वाले हैं भी युवा हैं.

अगर हम खास तौर पर अपने डी.यू. के कॉलेजेस की बात करें तो यहां भी तमाम तरह के युवा हैं. जो अलग-अलग बैकग्राउंड से आते हैं, अलग-अलग भाषा बोलने वाले हैं, अलग-अलग तजुर्बे वाले हैं, ज़िंदगी के लिए उनका नज़रिया अलग है, जो उनके अनुभवों से बना है, उनके लक्ष्य अलग हैं.

मैं युवाओं को इस नज़रिए से देखती हूं- जो साधन संपन्न युवा हैं वो थोड़े करियर ओरिएंटिड ज्यादा लगते हैं. जो साधन हीन हैं उनमें निराशा लगती है, लेकिन निराशा उनमें भी है जिनमें करियर को लेकर जिनका ज़्यादा झुकाव है और वो माहौल की देन है. सभी युवा अपने-अपने समय को प्रतिबिंबित करते हैं.

डॉ. संज्ञा उपाध्याय दिल्ली युनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज में प्रोफेसर हैं.

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