F Hussain, YuvaAdda.com

अगर ये पता हो कि अगले कुछ पलों में मरने वाले हैं तो हमारे कितने अपनो के चेहरे आंखो के सामने मुस्कुराते दिखेंगे, उनकी आवाज़ कानो में गूंजेगी. जब उस दिन मौत उसे अपनी आग़ोश में लिए बैठी थी तब उसने सिर्फ उसे याद किया जिसका चेहरा ना सिर्फ़ उसके अपनों में शुमार था बल्कि ख़्वाहिशों में भी बसा था. कभी इज़हार नहीं कर पाया था. दोस्त थे दोनो, बहुत अच्छे. या कहलो एक दूसरे को समझने की उन सरहदों को पार कर चुके थे जहां वो ‘सिर्फ़ दोस्त’ बनने का दिखावा करते थे. दिलों में दोनो के ही प्यार की कपोल फूट चुकी थी, बाकी था तो इज़हार…

एक्सीडेंट के बाद जब उसने ख़ुद को मौत के क़रीब पाया तो सबसे पहला ख़याल उसे अपनी शेरनी का ही आया. इसी नाम से बुलाता था वो उसे. मौत के बेहद क़रीब पहुंच कर थोड़ा होश और थोड़ी गफ़लत में अपने ख़ून से भीगे हाथ जख़्म से हटाए और कांपते हाथों से उसका नंबर डायल किया. वो इज़हार-ए-मुहब्बत करता, ये वक़्त को मंज़ूर न था. उसने फ़ोन पिक नहीं किया, देर रात का वक़्त था और वो चुकी थी.

अचानक आधी रात को दम रोकने वाली सी घुटन से उसकी नींद खुली, उठ कर बैठी तो सांसे बन ना पाईं. पानी पिया, गले से नीचे ना उतरा…, जैसे तैसे ज़मीन पर बैठकर हिम्मत करके लंबी-लंबी सांसे ली. टाइम देखने के लिए फ़ोन उठाया… रात के 12:31 हो रहे थे. घर के एक-एक कमरे में झांक आई, परिवार सूकून से सो रहा था. गर्मी के दिन थे, फिर वापस छत पर यूं ही बेचैन सी…अपने बिस्तर पर बैठ गई. फ़िर फोन में टाइम देखा और उसके ख़यालो में ख़ुद से ही बोली 1 बजने वाला है, कहां हो आज तुम जानां, कितने ख़राब हो अभी तक मेरे गुड नाइट का रिप्लाई नहीं किया. दरअसल, उनमें तय था, वो दिन भर बतयाये या ना, पर उसके गुड नाइट का जवाब वक्त पर ज़रूर देगा.

अचानक आंखों से आंसू टपकने लगे, आधी रात को आसमां की तरफ़ देखकर पूंछने लगी वो ठीक है ना…? चेहरा नीचे किया तो दो आंसू टपके,और गोद में रखी हथेलियो पर गिर पड़े. साइड में रखे फ़ोन में रोशनी हुई और लिखा आया ‘वन न्यू मैसेज’. मैसेज खोला तो फोन हाथ से गिर पड़ा. आसमां की तरफ देखकर रोते हुए बोली, अभी मेरी मुहब्बत शुरू भी नहीं हुई, इसे ख़्तम ना करो…

एक कॉमन दोस्त ने मैसेज किया था, ‘रात 11 बजे के क़रीब उसका एक्सीडेंट हो गया था. पिछले आधे घंटे से हालत बहुत सीरियस है, अभी ऑप्रेशन चल रहा है. दुआ करना यार…’ अब उसे अचानक हुई घुटन का सबब पता चला गया था. बिलखती हुई अपनी आवाज़ को दबाया, रात का सन्नाटा था आवाज़ दूर तलक जाती. बेचारी लड़की इस समाज में आधी रात को जी खोल रो भी नहीं सकती. आवाज़ को दबाकर रोते हुए हाथों को फैलाए दुआ करती रही…

घंटो बाद, जब रोते रोते आंसू सूख गए… घुटन भी कम होने लगी तो बड़ी हिम्मत करके दोस्त को फ़ोन किया, लगभग चार बजे थे. रोने के बाद की भर्राई आवाज़ को नींद में तबदील करने की कोशिश करते हुए बोली… अभी मैसेज पढ़ा, कैसी है अब तबियत ? ऑपरेशन हो गया ? कहां चोट आई ? लगी कैसे ? कहां गया था वो रात को? सब सवालों के बाद दोस्त ने कहा, अभी परेशान मत हो… सो जा, अब सही है वो, ख़तरे से बाहर है. सुबह मिलने आ जाना. बोली ओके, बाय. फोन रखा तो फिर हिड़की बंध गई… पहले दुआ मांगते हुए रो रही थी अब शुक्रिया कहते हुए… रोते रोते बिस्तर पे ओंधे मुंह पढ़े कब आंख लग गई पता नहीं चला. कहीं दूर से आती भजन और सुबह की अज़ान की घुली-मिली आवाज़ से नींद खुली.

सूरज पूरा चढ़ भी ना पाया था कि अस्पताल चली गई. आईसीयू के बाहर उससे मिलने जाने वालों की कतार में सबसे पीछे खड़ी थी. दूसरे की बातों में मशगूल होकर अंदर से आने वालों के चेहरों का सूकून देखकर खुद को तसल्ली दे रही थी ताकि जब अंदर जाए तो रो ना पड़े. नंबर आया और वो दरवाज़ा खोलकर अंदर गई.

साइड में रखे स्टूल पर ना बैठकर उसके बैड की पट्टी पर बैठी. उसने ऑक्सीजन मास्क पहने गर्दन घुमाई और आंसूओं से डगमगाती आंखें और बड़ी सी मुस्कान वाला चेहरा देखकर उसकी आंखें भी मुस्कुरा गईं. उंगलियों को बैड से उठाकर फिर वहीं रखते हुए थोड़ा और पास बैठने का ईशारा किया. वो नज़दीक सरकी तो उसने दाएं हाथ से बांए कांधे पर ढकी चादर हटाई और पट्टी लिपटे सीने पर इशारा करते हुए बताया चोट यहां लगी है. उसने अपने जिस्म की सारी हिम्मत समेटते हुए बड़ी सी मुस्कान देकर अपनी उंगलियों को चूमा और उन पट्टियों पर बड़ी नाज़ुकी से छुआ दिया. उसने मुस्कुराते हुए दाएं हाथ का अंगूठा पहली उंगली पर रखकर एक और बोसे की ख़्वाहिश ज़ाहिर की. वो फिर अपनी उंगलियों को चूमकर उसके सीने पर लिपटी पट्टियों पर रखने चली तो उसने इनकार करते हुए सीधे कंधे के सहारे से करवट ली. वो झुकी और उसके बांए कांधे के पीछे जख़्म देखा तो आंसू वहीं पोंछ लिए, ज़ख्म सीने के आर-पार था. फिर जख़्म के पास अपनी उंगलियों को रख दिया. इस दौरान उसने पहली बार उसके बदन की गर्माहट महसूस की, उसे सहारा देकर वापस लिटाया और चादर ठीक की.

इस बीच नर्स ड्रैसिंग करने आ चुकी थी. जिसे वो जु़बां से ना कह पाए थे उनका वो अनकहा सा इज़हार देखकर नर्स के गालों में नन्हे नन्हे कटोरे बन गए थे. नर्स ने पेशेंट की चादर हटाते हुए कहा ‘नाओ इट्स ड्रैसिंग टाइम’, नर्स पट्टियां खोलने लगी तो उसके मुंह से आह निकला… अपने प्यार उढ़ेलते जज़्बातों को समेटते हुए वो बोली अब इतने ड्रामे ना कर, ज़रा सा ही छेद हुआ है, पिट जाएगा वरना. ख़ुद कमरे से बाहर निकलते हुए इशारे से बोली नर्स से दूर रहना. उसकी इस धमकी पर वो कराहते हुए भी हंस पड़ा था, हंसता भी क्यों ना… किसी लड़की से दूर रहने के लिए उसने हक़ जताकर कहा ही पहली बार था.

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