रोज़ खो देती हूँ मैं मौके कई

छोड़ देती हूँ उम्मीदें नई

क्योंकि मैं एक लड़की हूँ

रोज़ हिम्मत करती हूँ 

जुर्म से लड़ने की

नाइंसाफ़ी ख़त्म करने की

फिर कोई याद दिलाता है

नहीं कर सकती हूँ यह सब

क्योंकि मैं एक लड़की हूँ

घर से अकेले बाहर जाना

आधी रात में वापस आना

नहीं है इसकी इजाज़त मुझे

क्योंकी मैं एक लड़की हूँ

कोई नज़र मुझे घेरे

तो चुप रहना है

उठाएंगे लोग फिर ऊँगली मुझ पर

क्योंकि मैं एक लड़की हूँ

आज घर वाले भी डरते हैं

पाबंदियाँ भी मुझ ही पर लगती हैं

वजह बस वही एक है

क्योंकि मैं एक लड़की हूँ

-Afshan Khan, YuvaAdda.com

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