Isha Fatima, YuvaAdda.com

अक्सर एक धुंधली सी तस्वीर नज़र में दौड़ जाती है. इस दिल के कोने में धूल से सनी कुछ यादें ज़ेहन में बरबस ही उभर आती हैं. सर्द सुबह में दिल को सुकून मिल जाता था…

वो दिन याद करके गुदगुदा उठती हूं. अक्सर तन्हाई में तुम्हारा ज़िक्र किया करती हूं. यूं तो मेरे सामने नौजवान कम न थे, मगर नज़रों की तलाश तुम पर ही ख़त्म होती थी.

वो उम्र ही कुछ ऐसी थी कि तन्हाई में भी तुम ही नज़र आते थे और महफ़िलों की रौनक भी तुम्हीं से होती थी.

अक्सर तुम्हारी नज़रे जब मुझ पर ठहर जाती थी. न सांस आ पाती थी न जान जाती थी. कभी आंखें तुम्हारा हाल पूछ लेती थीं, कभी धड़कनें बयां कर जाती थीं.

वो गुस्से में कभी जब तुम मुझे यूं देख लेते थे, मुहब्बत  के ब़ागीचें में फ़ूलों को रौंद देते थे. कभी हिम्मत न की तुमने हमारे पास आने की, न मुझको जान पाने की न खुद को सौंप पाने की.

हक़ीक़त में मुझे वो पल बहुत ही याद आता है. तुम्हारी मुस्कुराहट से मेरा दिन महक जाता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here