Isha Fatima, YuvaAdda.com

  1. मेरी राशि ‘मेष’ है और मुझे प्यार में सफलता नहीं मिलती, इसके लिए उपाए बताएं?

उ. समोसे के साथ रोज़ 20 ग्राम चटनी खाइए, सफलता मिलेगी.

 

  1. मेरी तीन बेटियां है पुत्र प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए?

उ. अपने पति से कहिए 10 सफेद शर्ट खरीदें और पहने, पुत्र प्राप्ति होगी.

 

  1. मेरा कारोबार ठप पड़ गया है कोई रास्ता बताइए?

उ. रोज़ाना 10 किमी. दौड़ा करें, कारोबार भी भागने लगेगा.

 

आज आप लोग सोच रहे होंगे कि किस तरह का ज्ञान बाटं रहीं हूं मैं…

जहां दुनिया आज कहां से कहां पहुंच गई है. साइंस और टेक्नालाजी के क्षेत्र में बढ़ते विकास ने पूरी दुनिया में हलचल मचा रखी है.

वहीं दूसरी ओर अंधविश्वास का मायाजाल दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है. सड़क पर दिखते पोस्टर हो या न्यूज़ चैनलों पर चलते प्रोग्राम, अंधविश्वास से लिपटी कहानियां देखने को मिल ही जाती है. अब तो मीडिया और इंटरनेट ने भी ऐसे पाखंड को इतना बढ़ावा दिया है कि फेसबुक-ट्वीटर पर इनकी जड़ें मज़बूत हो गई हैं.

वैसे तो बड़ी-बड़ी हस्तियों के नाम भी कई बार सुनने को मिले हैं, लेकिन अधिकतर संख्या कमज़ोर और बेबस लोगो की होती है, जो बड़ी आसानी से ढोंगियों के जाल में फंस जाते हैं. जिनका मक़सद सिर्फ़ और सिर्फ़ गरीबों का खून चूसना और किसी भी तरह उनसे पैसा निकलवाना होता है.

विश्वास के नाम पर ठगी करने वाले हर धर्म और जाति में देखने को मिलते हैं और इमोशनल फूल बनाकर खूब जेबें ढ़ीली करते हैं.

दरअसल, इन गरीब तबक़ों का दायरा सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान तक ही सीमित होता है. इनकी इच्छाएं और आशाएं बहुत सीमित होती हैं. परिवार की बेसिक खुशियों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते. इसलिए ऊपरी शक्ति का सहारा लेने ये मज़ारों और मंदिरों के नाम पर लूटने वाले ठेकेदारों के पास पहुंच जाते हैं.

इंसान इतना अंधा हो गया है कि धर्म और पाखंड में फर्क ही भूल गया है. इसका एक अहम कारण हमारी कमज़ोर सरकारें हैं, जो देश की हालात सुधारने में हमेशा नाकाम रही हैं. आधे वक्त हमारे नेता राजनीति करते हैं और बाकी समय घोटालों में चला जाता है. इसी हताशा के कारण ज़रुरतमंद लोगों को मजबूरी में पाखंडियों का दरवाज़ा खटखटाना पड़ता हैं.

सवाल यह उठता है कि इससे किसका फायदा हो रहा है? उस बाप का जो अपनी बेटियों की शादी की मन्नत मांगने आया है या उस बेबस मां का जो औलाद की इच्छा को साकार करने पहुची है? इससे सिर्फ़ उन लोगो का फायदा होता है जो धर्म और आस्था के नाम पर लोगो की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं और अपने घरों को भरते हैं.

असल में यह सिर्फ झूठे और बेइमान लोग हैं, जो लोगों को भटकाते हैं और उनके सीधेपन का फायदा उठाते हैं. इन पाखंडियों का पर्दाफाश कर इन्हें सिरे से ख़त्म करने के लिए हम सबकों आवाज़ उठानी होगी, जिससे  भोले-भाले लोगों को इनकी सच्चाई का पता चल सकें.

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