तेरे पास आने को जी चाहता है

तुझसे दिल लगाने को जी चाहता है

बहुत दिन से ख़ामोश हैं मेरे लब

अब तुझसे बात करने को जी चाहता है

हर तरफ ढूंढ कर थक गयी मेरी नज़रें

अब तुझे देखने को जी चाहता है

जो अब तक कह न पाई मेरी नज़रे तुझसे

अब राज़ ए दिल बताने को जी चाहता है

तुम जो रूठ जाते हो मुझसे मेरे दिलबर

तुम्हें फ़ौरन मनाने को जी चाहता है

ये इश्क़ है या मेरा दीवानापन

अब तुझको सताने को जी चाहता है

‘शरीफ’ रख के तस्वीर सीने पर अपने

बस लिपट के सो जाने को जी चाहता है.

Sharif ullah Mansori for YuvaAdda.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here