Sharjeel Jamshedpuri for Yuvaadda.com

मैंने सुबह देखा शाम देखा
इन ख्वाबो को सरे आम देखा

आसमां की बुलंदी, अहसास का समुन्दर
न जाने इन आँखों ने क्या क्या पैगाम देखा

पलक झपकते ही बिखर गए सारे
मैंने खुली आँखों से इसका अंजाम देखा

गालिब की गजल, मीर का इश्क, इकबाल का फिक्र ई हिंद
बिखरते सब मंज़र को बज़्म ए आम देखा

मुझको सोने नहीं देते सपने ही मेरे शरजील
आशिक़ो का यही मैंने अन्जाम देखा…

(Sharjeel Jamshedpuri, Bio sci. deptt, JMI)

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