जामिया में राजनीतिक इफ़्तार पार्टी के ख़िलाफ़ छात्रों की उठती आवाज़

मीरान हैदर कल से मेरे ज़ेहन में ये बात घूम रही है कि ओखला विधायक और अबुल फ़ज़ल वार्ड के काउंसलर ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 15 जून को जो इफ्तार पार्टी रखी है, वो...

क्या आपने भी अपने मां-बहन को घर में क़ैद कर रखा है?

Fatima Farheen for YuvaAdda.com हाल ही मुझे जानी-मानी फिमिनिस्ट कमला भसीन के एक सेमिनार में शामिल होने का मौक़ा मिला… कमला भसीन ने लेक्चर में जो बातें कहीं उसको शामिल करते हुए मैं अपनी बात...

सपने…

Sharjeel Jamshedpuri for Yuvaadda.com मैंने सुबह देखा शाम देखा इन ख्वाबो को सरे आम देखा आसमां की बुलंदी, अहसास का समुन्दर न जाने इन आँखों ने क्या क्या पैगाम देखा पलक झपकते ही बिखर गए सारे मैंने खुली आँखों से...

खुशियों का पिटारा…

दिल करता है वही बचपन लौट आए पानी में तैरती कश्ती हम फिर बनाएं तितली जुगनूं संग उड़ते जाएं ज़िंदगी की उलझने हमें छू भी न पाएं बेफिक्री की ज़िंदगी जीते जाएं दिल करता है वही बचपन लौट आए पानी...

कभी बेटियों से भी तो पूछो…

कभी बेटियों से भी तो पूछो, वो क्या चाहती हैं तितलियों सी नाज़ुक, वो तो बस उड़ना चाहती हैं... ख्वाहिशें उनकी भी तो जानो कभी ज़रा शायद माँ से लिपट के रोना चाहती हैं... हौसलों को मात दे...

डॉक्टरों की एक सच्चाई जिसे हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं

Isha Fatima, YuvaAdda.com अक्सर सुनती आई हूं डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होतें हैं. दुनिया में भगवान के बाद अगर कोई बचा सकता है तो वह डॉक्टर है. अपनी मम्मी के ठीक होने की...

Why does my Hijab bother you?

By Afshan Khan  “All the girls and boys are requested to remove their stalls, caps, dupattas etc., there should not be anything covering your neck,” said a man who was not an invigilator. I couldn’t...

ग़रीब की विरासत…

मैंने सच में देखा है सपनों को टूटते हुए अपनों को छूटते हुए तन्हाई से लड़ते हुए मैंने सच में देखा है तुफ़ानों में बहते हुए खामोशी से सहते हुए हर लम्हें से लड़ते हुए मैंने सच में देखा है सूनी पड़ी आंखों...

मेरी क़लम की दुनिया…

कुछ बातें हैं संसार की कुछ बातें हैं बेकार की.   कुछ फूलों के रंग हैं इसमें कुछ तितलियों के पंख हैं इसमें.   कुछ अनकही सी बातें हैं कुछ भूली हुई सी यादें हैं.   यह मेरे क़लम की दुनिया है जो मुझे...

क्या लड़कियां इंसान नहीं होतीं?

Sadaf Khan for YuvaAdda.com दिल्ली से महज़ 45 किलोमीटर दूर ग्रेटर नोएडा का एक गांव आज भी सामाजिक पिछड़ेपन का शिकार है. यहां आकर मुझे ऐसा महसूस होता है कि जैसे मैं किसी ऐसे दुनिया...

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