चाहत…

तेरे पास आने को जी चाहता है तुझसे दिल लगाने को जी चाहता है बहुत दिन से ख़ामोश हैं मेरे लब अब तुझसे बात करने को जी चाहता है हर तरफ ढूंढ कर थक गयी मेरी नज़रें अब तुझे...

अधूरे से इज़हार ने उनके इश्क़ को मुक़म्मल कर दिया था

F Hussain, YuvaAdda.com अगर ये पता हो कि अगले कुछ पलों में मरने वाले हैं तो हमारे कितने अपनो के चेहरे आंखो के सामने मुस्कुराते दिखेंगे, उनकी आवाज़ कानो में गूंजेगी. जब उस दिन मौत...

जब पहली बार उनका कुछ-कुछ शुरू हुआ था…

F Hussain, YuvaAdda.com वो दोनों सिर्फ़ दो साल से एक दूसरे को जानते थे... दोस्त नहीं कह सकते... क्योंकि फैमिली फ्रेंड जैसा मामला था. बस कभी-कभी फॉरवाडेड मैसेज़ भेज देने जैसी जान-पहचान थी. दोनों...

कभी धड़कनें कुछ ऐसा ही बयां कर जाती हैं…

Isha Fatima, YuvaAdda.com अक्सर एक धुंधली सी तस्वीर नज़र में दौड़ जाती है. इस दिल के कोने में धूल से सनी कुछ यादें ज़ेहन में बरबस ही उभर आती हैं. सर्द सुबह में दिल को...

भाई कुछ-कुछ नहीं, बहुत कुछ हो रहा है…

Sahil Champarani for YuvaAdda.com मेरा एक जूनियर है जो छोटे भाई की तरह है. अक्सर मेरे रूम पे आते-जाते रहता है. एक दिन अचानक से जब वो आया तो एक अजीब सी ख़्यालों में डूबा...

कैसे कहूँ कि मैं तुम्हारे बिना कुछ भी नहीं…

Nishat Hashmi for YuvaAdda.com कैसे कहूँ तुमसे, मैं तुम्हारी फेयरी टेल्स का कोई प्रिंस तो हूं नहीं. वो ख्वाबों की दुनिया जो तुम सजाकर आई थी, मुझे तो उससे कोई वास्ता नहीं. यारी-दोस्ती, मस्ती-मज़ाक मेरी तो...

दोस्ती की ऐसी मिसाल आपने शायद ही कभी देखी हो…

By Afroz Alam Sahil आप रोज़ अपने जान पहचान वाले लोगों से और यहाँ तक के कुछ अंजान लोगों से भी मिलते होंगे, लेकिन इनसे कभी नहीं मिले होंगे. ना ही ऐसी कोई कहानी सुनी...

हैप्पी न्यू ईयर मैडम!

Sahil Champarani for YuvaAdda.com "यार, ये हिटलर ही है ना, देख… देख… भाई कैसे तेल निकल रहा है इस हिटलर का…" "यार ये मैडम हैं अपनी, कुछ तो इज़्ज़त करना सीख"-सुनीत ने विनीत को समझाते हुए...

मेरे अपने सपने कहां खो गए, पता ही नहीं चला!

Akanksha Bhatnagar for YuvaAdda इस भाग दौड़ की ज़िन्दगी में मेरे अपने सपने कहां खो गए, पता ही नहीं चला. रोज़ सुबह से शाम तक की ड्यूटी निभाते-निभाते हर रोज़ सबको खुश करते-करते कभी-कभार थक जाती हूं....

Lucky Loves Lovely…

Abdul Malin for Yuvaadda.com It was 5’ o clock at evening; I was standing on the bridge waiting for my friend who planned for a movie, It was pleasant and lovely climate that my heart...

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