ज़रूरी नहीं है कि रवायतों, तहज़ीबों या संस्कारों पर तभी अमल किया जाए जब वे काग़ज़ों पर लिखित रूप में मौजूद हों. कभीकभी बुद्धि का सामान्यतः प्रयोग करके और बिना काग़ज़ी दलीलों के भी उन पर अमल किया जा सकता है, क्योंकि तहज़ीब ही किसी विचारधारा की आत्मा होती है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पूरी दुनिया में अपने संस्कारों की वजह से जाना जाता है. आज जब पश्चिमी सभ्यता हमारे विश्वविद्यालयों पर सिर चढ़कर बोल रही है, उस दौर में भी एएमयू की एक सभ्य विश्वविद्यालय के रूप में छवि बनी हुई है. यहाँ के छात्र संघ को भी बाकी विश्वविद्यालयों के छात्र संघों से अलग माना जाता है, क्योंकि यह पूरी तरह से गैरराजनीतिक होता है. 

लेकिन संस्कार, सभ्यताएं और तहज़ीब जब अपने लोग ही तोड़ते हैं तो बाहरी ख़तरे बढ़ जाते हैं. ख़बर यह है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष फैज़ुल हसन और सचिव नबील उस्मानी ने दिनांक गत 9 फरवरी को अलीगढ़ के होटल पाम ट्री में एक प्रेस वार्ता कर मुस्लिम मतदाताओं से बहुजन समाज पार्टी को वोट करने की अपील की है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी पदाधिकारी ने पद पर रहते हुए किसी राजनीतिक दल का समर्थन किया है. इससे पहले भी छात्र संघ अध्यक्ष अलीगढ़ कोल विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार हाजी ज़मीरूल्लाह के समर्थन में प्रचार करते हुए नज़र आए थे.

लेकिन इन सबके बीच दिलचस्प ये है कि मुसलमानों को एकजूट करने की बात करने वाली ये छात्र संघ खुद एकजूट नहीं है.

जहां एक तरफ़ छात्र संघ अध्यक्ष फैज़ुल हसन कह रहे हैं कि,बहुजन समाज पार्टी इकलौती ऐसी पार्टी है जो बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के विचारों पर खड़ी है और अल्पसंख्यकों, कमजोरों पिछड़ों के लिए संघर्षरत है.’ 

और सचिव नबील उस्मानी का कहना है कि,बहुजन समाज पार्टी वर्तमान समय की ज़रूरत है. आज कुछ विशेष विचारधाराओं को छात्रों पर थोपा जा रहा है और जिसके परिणाम रोहित वेमुला और नजीब अहमद के रूप में हमारे सामने है. समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधाराओं पर चलती है, अतः उसे सत्ता से बाहर करना चाहिए.’

IMG-20170209-WA0015

वहीं दूसरी तरफ़ उपाध्यक्ष नदीम अंसारी इन दोनों पदाधिकारियों से बिल्कुल सहमत नज़र नहीं रहे हैं. इन बयानों की कठोर शब्दों में आलोचना करते हुए उन्होंने कहा है कि,अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ का इतिहास रहा है कि उसने कभी किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं किया है. हमें कोई आपत्ति नहीं है अगर अध्यक्ष और सचिव महोदय निजी रूप से किसी का समर्थन करते हैं. लेकिन अगर वे किसी राजनीतिक दल का समर्थन छात्र संघ का नाम लेकर करेंगे तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मैं इस फैसले के खिलाफ़ हूँ और जल्द ही छात्रों के साथ बातचीत करूँगा.’ नदीम ने अध्यक्ष सचिव से इस्तीफे की मांग भी की है.

फिलहाल दोनों पक्षों में ज़ुबानी जंग छिड़ी हुई है. सोशल मीडिया पर मुद्दा गरमाता जा रहा है. छात्र संघ के कैबिनेट सदस्य भी दो खेमों में बंट गये हैं. देखने वाली बात होगी कि अपनी सफ़ाई में अध्यक्ष और सचिव महोदय क्या कहते हैं और उपाध्यक्ष नदीम उस पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here