दिल करता है वही बचपन लौट आए

पानी में तैरती कश्ती हम फिर बनाएं

तितली जुगनूं संग उड़ते जाएं

ज़िंदगी की उलझने हमें छू भी पाएं

बेफिक्री की ज़िंदगी जीते जाएं

दिल करता है वही बचपन लौट आए

पानी में तैरती कश्ती हम फिर बनाएं

कीचड़ में खुशियां बसती थी

रेत के घरौंदो में सपने

आशिकीं खिलौनों से हुआ करती थी

और ख्वाबों से झगड़े

रिश्तों के झमेले समझ में आते थे

उनके टूट जाने का ग़म

दुख समझ में आता था

किसी के रूठ जाने का ग़म

दिल करता है वही बचपन लौट आए

पानी में तैरती कश्ती हम फिर बनाए

दिन खेलों में कट जाता था

लोरिया रातों की रौनक़

चंदा से बातें करते थे

तारों की होती चाहत

दिल करता है वही बचपन लौट आए

पानी में तैरती कश्ती हम फिर बनाए

Isha Fatima,  YuvaAdda.com

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